अक्षय तृतीया का हिंदू समाज में महत्व

अक्षय तृतीया का शुभ मुहूर्त  28 अप्रैल 2017 को प्रातः 10.28 से शुरू होकर 29 अप्रैल 2017 को प्रातः 6 बजकर 55 मिनिट तक रहेगा | हिंदू धर्म  में अक्षय तृतीया का विशेष महत्व है | अक्षय तृतीया के देवता भगवान विष्णु है | त्रेता युग की शुरुआत भी अक्षय तृतीया के दिन हुई थी | अक्षय तृतीया के दिन आपके द्वारा किए गये शुभ कार्यो का शुभत्व फल अक्षते होता है | अतः शुभ मुहूर्त पूरे दिन होता है | एवम अक्षय तृतीया के दिन किया गया जाप – दान- पुण्यतीर्थो का स्नान तीर्थ स्थानो पर पितरो के निर्मित पिन्डदान तर्पण ब्राह्मणभोज़ – स्वर्णदान का पुण्य अक्षय होता है |

अक्षय तृतीया के दिन  ‘ओम नमो नारायण’ मंत्र का  निरन्तर मानसिक जाप करने से अक्षय शुभ फलो की प्राप्ती होता है |
अक्षय तृतीया के दिन अगर आप प्रातः 10:30 से 12:30 मध्य अपने निवास स्थान के सर्वोच्च शिखर पर ब्रह्ममा स्थान (middle point) पर ११ फीट के लोहे के पाईप पर १.२५ मीटर क्पडे का “भगवा ध्वज” नवग्रह पूजा एवम कन्यापूजन करके स्थापना करने से आपके निवास स्थान पर वर्षभर सात्विक उर्जा प्राप्त होती रहेगी |

ब्रहम मुहूर्त  मे प्रातः ४ बजे से सुबह ५ बजे तक देवतागण आकाश मार्ग मे विचरण करते है | भगवा ध्वज हिंदू धर्म एवम् सनातन परंपरा का प्रतीक है | जिस घर पर भगवा ध्वज लहरा रहा होता है | देवतागण नित्य आशीर्वाद से सुख सोभाग्या से सम्पन्नता बनी रहती है |

अतः परिवार मे सुख सम्पन्नता एवम् हर्षोल्लास एवम् सात्विक उर्जा हेतु प्रत्येक हिंदू को घर पर अक्षय तृतीया के दिन भगवा स्थापना करना विशेष अक्षय लाभकारक रहता है |

अक्षय तृतीया के दिन प्रत्येक हिंदू परिवार को ३० इंच की खड़ग खरीदना धर्म की रक्षा कारक एवम् कम से कम यथा सामर्थ्य स्वर्ण का संग्रह सम्पन्नता कारक होता है | भगवा स्थापना से परिवार मे आरोग्यता एवम् धर्म के प्रति आस्था से “शुभ लाभ” मिलता है | अक्षय तृतीया के दिन ग्रह प्रवेश द्वार पर प्रातः जल छिड़क कर स्वस्तिक का चिनह बनाना एवम् कन्या एवम् गाय-ब्राह्मण का पूजन करने से अक्षय आरोग्य एवम् संपाति लाभ होता है |

अक्षय तृतीया के दिन ग़रीबो मे मिष्ठान वितरण करने से विवाह मे विलंब दूर होता है | लंबी बीमारी से छुटकारा मिलता है | एवम् अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है | निसंतान दंपति को अक्षय तृतीया के दिन ग़रीबो मे वस्त्र-मिष्ठान एवम् ग़रीब बच्चो मे मीठादूध बाटने से अक्षय लाभ होता है एवम् संतान सुख प्राप्त होता है |

सनातन धर्म मे अक्षय तृतीया मे किए गये दान-पुण्य तीर्थ का अक्षय लाभ होता है | एवम् मुक्ति का मार्ग प्रशस्त होता है |

ओम नमः नारायण
इति शुभम
सन्तबेतरा अशोका
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